सनातन धर्म रक्षा दल समिति कैथल हरियाणा (भारत )

जागृति का दीप जलाएं, सनातन धर्म बचाएं ।

1954 से आज तक: अनुच्छेद 370/35A की कहानी, उसके नकारात्मक प्रभाव और 2019 के बाद के ठोस बदलाव

जम्मू-कश्मीर (J&K) के विशेष प्रावधानों को लेकर बहस केवल राजनीति नहीं, नागरिक अधिकारों, समानता और विकास की भी है। 14 मई 1954 के राष्ट्रपति आदेश—The Constitution (Application to Jammu and Kashmir) Order, 1954—के ज़रिये भारत के संविधान के कई हिस्से J&K पर विशेष शर्तों के साथ लागू किए गए और इसी मार्ग से अनुच्छेद 35A जोड़ा गया। यही वह मोड़ था जिसने दशकों तक “स्थायी निवासी” की परिभाषा और उससे जुड़ी विशेषाधिकार व्यवस्था को जन्म दिया। Asset Typespmrf.orgIndian Kanoon

इस लेख में हम देखेंगे कि 1954 के बाद क्या-क्या बदला, किन समुदायों पर क्या असर पड़ा, और 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद ज़मीनी हक़ीक़तें किन आंकड़ों में दिखती हैं—साथ ही 11 दिसंबर 2023 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से आज (2025) की वैधानिक स्थिति क्या है। ladakh.gov.inSupreme Court Observer


1954 का आदेश, अनुच्छेद 370 और 35A: क्या था, कैसे चला?

1954 का राष्ट्रपति आदेश (C.O. 48)—जिसने 1950 के पहले आदेश को प्रतिस्थापित किया—के माध्यम से अनुच्छेद 370 के तहत केंद्र संविधान के प्रावधान J&K पर लागू करता रहा। इसी आदेश से अनुच्छेद 35A जोड़ा गया, जिसने J&K की विधानसभा को “स्थायी निवासी (Permanent Residents)” परिभाषित करने और उनके लिए विशेष अधिकार तय करने की शक्ति दी—जैसे भूमि-संपत्ति का स्वामित्व, सरकारी नौकरियाँ, छात्रवृत्ति और राज्य कल्याण योजनाओं में प्राथमिकता। बाहरी भारतीय नागरिक (Non-PRs) इन सुविधाओं से वंचित थे। Asset TypeWikipediaIndian Kanoon

सरल भाषा में: 35A एक “फ़िल्टर” था—जिसके बिना आप जमीन नहीं ख़रीद सकते, सरकारी नौकरी/स्कॉलरशिप नहीं पा सकते, स्थानीय निकाय/विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते थे। Al JazeeraTestbook


35A और व्यवस्था के नकारात्मक प्रभाव: किन पर और कैसे?

1) संपत्ति और आजीविका पर बंदिशें

ग़ैर-स्थायी निवासी भारतीयों के लिए J&K में स्थायी बसना, भूमि-खरीद, राज्य सेवाओं में प्रवेश—लगभग असंभव था। इससे आर्थिक प्रवाह, निवेश, प्रतियोगिता और विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ा। यह स्थिति 2019 तक बनी रही। Al Jazeera

2) महिलाएँ: विवाह के साथ अधिकारों पर ग्रहण

लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि J&K की स्थायी निवासी महिला अगर राज्य से बाहर के व्यक्ति से विवाह करे तो उसकी और उसके बच्चों की उत्तराधिकार/संपत्ति पर अधिकार पर असर पड़ेगा। 2002 में J&K हाईकोर्ट के फ़ुल बेंच फ़ैसले ने प्रमुख पहलू साफ़ किए, पर व्यवहार में असमंजस और भेदभाव की चर्चा 2010 के दशक तक चलती रही। SwarajyaThe Indian ExpressReuters

3) पश्चिम पाकिस्तान शरणार्थी (WPR), वाल्मीकि, गोरखा समुदाय

1947-65 के आसपास आए हज़ारों WPR परिवार J&K में बस गए, पर 35A/स्थायी निवासी ढांचे के कारण दशकों तक उन्हें जमीन के स्वामित्व और राज्य नौकरियों सहित कई अधिकार नहीं मिले। यह “क़ानूनी स्थायी निवासी” की संकीर्ण परिभाषा के दुष्परिणाम थे। 2019 के बाद इन समुदायों के अधिकारों पर प्रगति तेज़ हुई—यहाँ तक कि 2024-25 में भूमि स्वामित्व अधिकारों की औपचारिक मंज़ूरी की ख़बरें भी आईं। rightsrisks.orgAnadolu AjansıStatetimes

ध्यान दें: 1954 में J&K सरकार ने कुछ भूमि आवंटन WPR परिवारों को करने की बात कही थी, पर स्थायी निवासी का दर्जा और उससे जुड़े अधिकार व्यापक रूप से नहीं मिल सके—वही मूल समस्या थी जिसे 35A के ढांचे ने पैदा किया। issi.org.pk


2019 का टर्निंग पॉइंट: निरस्तीकरण कैसे हुआ, आज की वैधानिक स्थिति क्या है?

5 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति ने C.O. 272 जारी कर 1954 वाले आदेश को अप्रभावी करते हुए भारत के संविधान के सभी प्रावधान J&K पर लागू कर दिए। अगले दिन C.O. 273 और Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के ज़रिये राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया गया। ladakh.gov.inSupreme Court ObserverMinistry of Home Affairs

11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट की पाँच-सदस्यीय बेंच ने सरकार के क़दम को संवैधानिक ठहराया; साथ ही निर्देश दिया कि J&K विधानसभा चुनाव 30 सितंबर 2024 से पहले कराए जाएँ और राज्य का दर्जा यथाशीघ्र बहाल किया जाए। 2025 में इस अनुपालन पर सर्वोच्च न्यायालय में मॉनिटरिंग संबंधी सुनवाई जारी रहने की ख़बरें आईं। Supreme Court ObserverThe Times of Indiawww.ndtv.com


2019 के बाद क्या बदला?—तथ्य और आँकड़ों में

1) सुरक्षा परिदृश्य

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के हवाले से 2019 की तुलना में 2024 तक J&K में आतंकी घटनाओं में ~70% गिरावट की बात सामने आई। यह आँकड़े संसदीय पैनल को दिए गए थे और कई प्रमुख सूचक (हमले, पत्थरबाज़ी, नेटवर्क फ़ाइनेंसिंग) में कमी का संकेत देते हैं। The Indian Express

सावधानी: 2025 में कुछ गंभीर आतंकी घटनाएँ और संवेदनशील घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग भी हुई जिनसे पर्यटन-विश्वास पर चोट पहुँची—यानी सुरक्षा में समग्र सुधार के बावजूद शून्य-जोखिम की स्थिति नहीं है। यह विरोधाभास नीति-निर्माताओं के लिए काम का विषय है। Reuters

2) पर्यटन

2019 के बाद पर्यटन-आंकड़ों में तेज़ उछाल दर्ज हुआ—2023-24 में रिकॉर्ड फुटफ़ॉल का दावा हुआ; 2024 में जम्मू और कश्मीर—दोनों क्षेत्रों में समग्र पर्यटक संख्या बहुत ऊँची बताई गई। हालाँकि कुछ रिपोर्टों ने “काउंटिंग मेथड” पर आलोचनात्मक प्रश्न भी उठाए (जैसे धार्मिक यात्रियों को कुल पर्यटक में जोड़ना)। 2025 की शुरुआत में एक बड़े हमले के बाद बुकिंग कैंसिलेशन और अस्थायी गिरावट की खबरें भी आईं। यानी ट्रेंड बढ़त का रहा, पर संवेदनशील बना हुआ है। jandktourism.jk.gov.intourism.gov.inDeccan HeraldReuters

3) निवेश और रोज़गार

J&K प्रशासन ने औद्योगिक निवेश आकर्षित करने को लेकर लाखों करोड़ के प्रस्तावों/आवेदन का दावा किया। लेकिन वास्तविक ग्राउंडेड निवेश (2019-2025) का अनुपात प्रस्तावों की तुलना में सीमित रहा—लगभग ₹10,500 करोड़ के आसपास का आँकड़ा सामने आया, जो “मंज़ूर/प्रस्तावित ₹1.6–1.7 लाख करोड़” की तुलना में कम है। यह गैप नीति-कार्यान्वयन, भूमि, सुरक्षा-जोखिम और परियोजनाओं की परिपक्वता से जुड़ा है। Deccan HeraldTHE GEOSTRATA

4) डोमिसाइल नियम और नए अधिकार

2020 के डोमिसाइल नियम के बाद, जो लोग निश्चित अवधि तक J&K में रहे/पढ़े हैं, वे डोमिसाइल प्रमाणपत्र लेकर भूमि-नौकरी के अधिकार पा सकते हैं। सरकार के अनुसार 2022-25 में ~83,000 ऐसे गैर-स्थायी निवासी भारतीयों को डोमिसाइल मिला। 2021 तक कुल आवेदनों/जारी प्रमाणपत्रों के लाखों के आँकड़े PIB ने साझा किए थे। यह दर्शाता है कि “स्थायी निवासी” की पुरानी दीवार टूटकर अधिक समावेशी ढाँचा बना है—हालाँकि इससे स्थानीय आशंकाएँ भी बढ़ीं। Business StandardPress Information BureauAl Jazeera

5) WPR/वाल्मीकि/गोरखा समुदायों के अधिकार

2019 के बाद इन समुदायों को नागरिक/भूमि/रोज़गार के अधिकारों में ठोस बढ़त मिली—2024-25 में जमीन के स्वामित्व अधिकारों की औपचारिक मंज़ूरियों की रिपोर्टें आईं। यह वही समूह है, जिसे 35A-ढाँचे में सबसे ज्यादा वंचना झेलनी पड़ी थी। Anadolu AjansıStatetimes


1954-2019: “नकारात्मक प्रभाव” का समग्र विश्लेषण

  1. संवैधानिक असमानता: 35A ने भारतीय नागरिकों के एक हिस्से को J&K में दूसरे दर्जे का बना दिया—वे न तो भूमि खरीद सकते थे, न राज्य नौकरियों/कल्याण योजनाओं में बराबरी पा सकते थे। इससे “नागरिकता की एकता” के सिद्धांत को धक्का लगा। Wikipedia
  2. आर्थिक अलगाव: बाहरी पूँजी/प्रतिभा का प्रवेश अवरुद्ध होने से औद्योगिकीकरण, रोजगार-निर्माण और प्रतिस्पर्धा सीमित रही; स्थानीय बाज़ार अपेक्षाकृत बंद रहे। 2019 के बाद भी निवेश वास्तविकता में समय ले रहा है—यानी नुकसान तत्काल भरपाई वाला नहीं। Deccan Herald
  3. लैंगिक-न्याय का सवाल: 2002 के HC फ़ैसले ने महिलाओं के अधिकारों पर स्पष्टता दी, पर 35A-केंद्रित व्यवस्था में वर्षों तक अधिकार-अनिश्चितता बनी रही, जो समानता की संवैधानिक आत्मा के विपरीत थी। The Indian Express
  4. शरणार्थी/दलित समुदायों की वंचना: WPR, वाल्मीकि, गोरखा—दशकों तक भूमि-स्वामित्व और राज्य अधिकारों से कटे रहे। यह 35A की सबसे तीखी मानवीय लागत थी—जिसकी आंशिक भरपाई अब शुरू हुई है। rightsrisks.orgAnadolu Ajansı

2019 के बाद की “आज की स्थिति”: उपलब्धियाँ, सीमाएँ और सवाल

उपलब्धियाँ (डेटा-समर्थित संकेत)

  • सुरक्षा सूचकों में गिरावट: 2019→2024 के बीच घटनाओं में ~70% कमी का सरकारी दावा। The Indian Express
  • पर्यटन में तेज़ी: 2022-24 में रिकॉर्ड/उच्च फुटफ़ॉल; आधिकारिक चार्टों में महीने-दर-महीने ऊँचे आंकड़े दिखे—हालाँकि मेथडोलॉजी पर बहस भी हुई। jandktourism.jk.gov.intourism.gov.in
  • समावेशी डोमिसाइल: 83,000+ “नॉन-PR” को डोमिसाइल—पुरानी बाधाएँ टूटना शुरू। Business Standard
  • वंचित समुदायों को अधिकार: WPR/वाल्मीकि/गोरखा समूहों के लिए मतदान/भूमि/नौकरी के रास्ते खुले। Statetimes

सीमाएँ/चुनौतियाँ

  • निवेश के धरातल पर गति अपेक्षाकृत धीमी; बड़े MoU → ग्राउंडिंग में गैप। Deccan Herald
  • 2025 में कुछ गंभीर आतंकी वारदातों ने नाजुकता उजागर की; पर्यटन-विश्वास पर तात्कालिक चोट। Reuters
  • लोकतांत्रिक प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने 11 Dec 2023 को 30 Sep 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने को कहा था; 2025 में भी अदालत में इस अनुपालन/राज्य-बहाली पर सुनवाई की ख़बरें जारी रहीं। Supreme Court Observerwww.ndtv.com

370/35A की वैधानिक यात्रा के माइलस्टोन (टाइमलाइन)

  • 14 मई 1954: C.O. 48; 35A जुड़ा; स्थायी निवासी/विशेष अधिकार व्यवस्था प्रभावी। Asset Type
  • 2002: J&K हाईकोर्ट फ़ैसला—महिलाओं के अधिकारों पर महत्वपूर्ण स्पष्टता। The Indian Express
  • 5–6 अगस्त 2019: C.O. 272/273; 1954 आदेश निरस्त; 35A खत्म; J&K का पुनर्गठन UTs में। ladakh.gov.inSupreme Court Observer

11 दिसंबर 2023: सुप्रीम कोर्ट ने निरस्तीकरण को बरकरार रखा; चुनाव/राज्य-बहाली पर निर्देश। Supreme Court Observer

राजनीतिक संदर्भ: प्रधानमंत्री का उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल (2019) की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने संसद में प्रस्ताव रखकर अनुच्छेद 370 की विशेष स्थिति को हटाने की प्रक्रिया शुरू की और राष्ट्रपति आदेश (C.O. 272/273) जारी हुए। 2019 के बाद से केंद्र सरकार J&K में सुरक्षा-विकास एजेंडा, औद्योगिक निवेश, पर्यटन-प्रोत्साहन और स्थानीय निकाय सुदृढ़ीकरण जैसे मोर्चों पर जोर देती रही है; 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद चुनाव/राज्य-बहाली पर अदालत-निर्देश लागू करना सरकार-और-चुनाव आयोग के लिए केंद्रीय प्रश्न बना हुआ है। ladakh.gov.inSupreme Court Observer


क्या 1954 की राह “गलत” थी?—एक समालोचनात्मक निष्कर्ष

1954 के आदेश और 35A-केंद्रित ढाँचे ने क़ानूनी विशेषाधिकार देकर J&K को भारत के संवैधानिक ढांचे में एक अलग कक्ष में बैठाया। इरादा चाहे जो रहा हो, परिणामों में—

  • भारत के बाकी नागरिकों के लिए समान अधिकार की अवधारणा को चुनौती मिली,
  • आर्थिक-सामाजिक समावेशन बाधित हुआ,
  • कुछ समुदाय दशकों तक अधिकार-वंचना में रहे,
  • और महिलाओं के अधिकारों पर लंबा कानूनी-अनिश्चितता काल दिखा। Wikipediarightsrisks.orgThe Indian Express

2019 के बाद कानूनी ढांचा एकरूप हुआ—पर “विशेष से सामान्य” की यात्रा में चुनौतियाँ स्वाभाविक हैं: सुरक्षा-जोखिम का अवशेष, निवेश के ज़मीनी क्रियान्वयन की सुस्ती, और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व (विधानसभा) की बहाली। सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बावजूद समयबद्ध चुनाव और राज्य-दर्जा बहाली जैसे Pending-Deliverables पर 2025 तक निगाहें टिकी हुई हैं। Supreme Court Observerwww.ndtv.com


आगे का रास्ता: संतुलित नीति क्या हो?

  1. लोकतांत्रिक वैधता: समयबद्ध विधानसभा चुनाव और राज्य-बहाली से जन-विश्वास मज़बूत होगा—यह सर्वोच्च न्यायालय की भावना भी है। Supreme Court Observer
  2. क़ानूनी-प्रशासनिक सरलता: भूमि/उद्योग/पर्यावरण स्वीकृतियों का वन-स्टॉप तंत्र; वास्तविक निवेश की गति बढ़ेगी। Deccan Herald
  3. सुरक्षा-विकास का दोहरा ट्रैक: घटनाओं में गिरावट को स्थायी बनाने के लिए स्थानीय रोज़गार-उद्यमिता, पर्यटन-इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक-समरसता पर सतत निवेश ज़रूरी है। The Indian ExpressDeccan Herald
  4. अधिकारों का समावेशी विस्तार: WPR/वाल्मीकि/गोरखा सहित हाशिये के समूहों के नये अधिकारों को जमीनी सेवाओं से जोड़ना—स्वामित्व, स्किल, शिक्षा-स्वास्थ्य। Statetimes
  5. डेटा-पारदर्शिता: पर्यटन/निवेश के दावों में पारदर्शी पद्धति—जैसे तीर्थ-आगंतुकों को अलग मापना—नीति-बहस को स्वस्थ बनाता है। Deccan Herald

समापन

1954 के राष्ट्रपति आदेश से शुरू हुई अलग राह ने J&K को दशकों तक “विशेष” रखा, पर उस विशेषता की कीमत एक बड़े हिस्से ने अवसर-वंचना से चुकाई। 2019 के बाद का दौर उस असमानता को उलटने का प्रयास है—कानूनी एकरूपता, सुरक्षा में सुधार, पर्यटन-विकास, डोमिसाइल-समावेशन जैसे संकेत आश्वस्त करते हैं; फिर भी निवेश की धरातली रफ़्तार, संवेदनशील सुरक्षा-पर्यावरण और लोकतांत्रिक बहाली—ये तीन बातें तय करेंगी कि “विशेष से सामान्य” की यात्रा स्थायी शांति और समानता तक पहुँचती है या नहीं।


संदर्भ/हवाले (चयन):

  • 1954 का आदेश (C.O. 48) और 35A का सम्मिलन। Asset Typespmrf.orgIndian Kanoon
  • 35A के अधिकार/प्रतिबंध—भूमि/नौकरी/स्कॉलरशिप। WikipediaAl Jazeera
  • महिलाओं के अधिकार—2002 J&K HC और बाद की बहस। The Indian ExpressReuters
  • WPR/वाल्मीकि/गोरखा—ऐतिहासिक वंचना और 2019 के बाद बदलाव। rightsrisks.orgAnadolu AjansıStatetimes
  • 2019 का निरस्तीकरण: C.O. 272/273; पुनर्गठन अधिनियम। ladakh.gov.inSupreme Court Observer
  • सुप्रीम कोर्ट (11 दिसंबर 2023) का निर्णय व निर्देश। Supreme Court Observer
  • सुरक्षा घटनाओं में गिरावट (2019→2024)। The Indian Express
  • पर्यटन—आधिकारिक आँकड़े व पद्धति-बहस, 2025 की गिरावट संदर्भ। jandktourism.jk.gov.intourism.gov.inDeccan HeraldReuters
  • निवेश—प्रस्ताव बनाम ग्राउंडिंग का अंतर। Deccan Herald
  • डोमिसाइल—नए नियमों के तहत 83,000+ नॉन-PR को प्रमाणपत्र।

सनातन धर्म रक्षा दल का स्पष्ट मत है — धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है समानता। अगर वक्फ बोर्ड स्वतंत्र है तो मंदिर भी स्वतंत्र होने चाहिए। केवल तब ही संविधान का अनुच्छेद 26 वास्तव में न्यायपूर्ण कहलाएगा।


✍️ लेखक: अशोक खत्री
प्रधान, सनातन धर्म रक्षा दल, कैथल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *